ओल चिकी लिपि शताब्दी वर्ष में संथाल समाज का गौरव: सत्य नारायण मुर्मु सम्मानित।

चांडिल,संथाल समाज की पहचान और गौरव की प्रतीक ओल चिकी लिपि के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में 15–16 फरवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित Dr. Ambedkar International Centre में भव्य दो दिवसीय शताब्दी समारोह का आयोजन किया गया। ओल चिकी लिपि के जनक गुरु गोमके Raghunath Murmu द्वारा सन 1925 में रचित इस लिपि ने संथाली भाषा को नई पहचान और सम्मान दिलाया है।
इस ऐतिहासिक समारोह का उद्घाटन भारत की महामहिम राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने किया। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि ओल चिकी लिपि केवल एक लेखन प्रणाली नहीं, बल्कि संथाल समाज की सांस्कृतिक पहचान, गौरव और आत्मसम्मान का प्रतीक है। इस अवसर पर गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू के चित्र तथा ओल चिकी लिपि से अंकित 100 रुपये का स्मारक सिक्का और 5 रुपये का विशेष डाक टिकट भी जारी किया गया, जिसने पूरे देश के संथाल समाज को गौरवान्वित किया।



कार्यक्रम में ओल चिकी लिपि के शिक्षण, संरक्षण और प्रचार-प्रसार में योगदान देने वाले 100 चयनित व्यक्तियों को सम्मानित करने की योजना थी। हालांकि समय की कमी के कारण 16 फरवरी को राष्ट्रपति के हाथों केवल कुछ ही लोगों को सम्मानित किया जा सका, जबकि शेष लोगों को सम्मानित करने की जिम्मेदारी फागुन पत्रिका के आयोजकों को सौंपी गई।
उसी क्रम में झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला स्थित Dhad Dishom Majhi Pargana Mahal में आयोजित कार्यक्रम में फागुन पत्रिका की ओर से ओल चिकी लिपि के प्रचार-प्रसार में योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता सत्य नारायण मांझी को भी सर्टिफिकेट, मोमेंटो, डाक टिकट, फागुन पत्रिका तथा अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।











उन्होंने कहा कि आज उसी संथाल समाज से देश की राष्ट्रपति Droupadi Murmu का होना पूरे आदिवासी समाज के लिए गर्व का विषय है। ऐसे महान पूर्वजों की विरासत वाले समाज से जुड़ा होना उनके लिए सम्मान की बात है और ओल चिकी लिपि के प्रचार-प्रसार के लिए सम्मानित होना उनके जीवन का प्रेरणादायक क्षण है।
उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र और संथाल समाज का सम्मान है। यह उन्हें अपनी मातृभाषा, ओल चिकी लिपि और संथाल संस्कृति के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के लिए और अधिक समर्पण के साथ कार्य करने की प्रेरणा देता है।