आसनबनी में जाताल पूजा संपन्न, 
अच्छी फसल और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना।









चांडिल प्रखंड के आसनबनी गांव में पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ हुई जाताल पूजा, श्रद्धालुओं में उत्साह

चांडिल,सरायकेला खरसावां जिले के चांडिल प्रखंड अंतर्गत आसनबनी गांव में सोमवार को आदिवासी परंपरा एवं सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक जाताल पूजा श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। गांव के धार्मिक स्थल पर आयोजित इस पूजा में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया तथा क्षेत्र की सुख-समृद्धि, अच्छी वर्षा और बेहतर फसल उत्पादन की कामना की।

इस अवसर पर गांव के पारंपरिक पुजारियों उच्छप पहाड़िया एवं भूषण पहाड़िया ने संयुक्त रूप से पूजा-अर्चना कर प्रकृति, ग्राम देवता तथा पूर्वजों का स्मरण किया। पूजा के दौरान क्षेत्र की खुशहाली, किसानों की उन्नति, परिवारों की सुख-शांति तथा समाज में आपसी भाईचारे की भावना बनाए रखने की प्रार्थना की गई। ग्रामीणों ने भी पूजा स्थल पर पहुंचकर माथा टेका और अपने परिवार की मंगलकामना की।

जाताल पूजा आदिवासी मूलवासी समाज की एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा मानी जाती है। इस पूजा का उद्देश्य प्रकृति और देव शक्तियों के प्रति आभार व्यक्त करना तथा अच्छी खेती-बाड़ी और भरपूर उपज की कामना करना होता है। ग्रामीण मान्यता के अनुसार इस पूजा से गांव में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है तथा प्राकृतिक आपदाओं और बीमारियों से भी सुरक्षा मिलती है।

पूजा कार्यक्रम के दौरान गांव का वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बना रहा। पूजा स्थल को पारंपरिक तरीके से सजाया गया था। ग्रामीण सुबह से ही पूजा की तैयारियों में जुटे हुए थे। पूजा के लिए आवश्यक सामग्री जैसे फूल, धूप, दीप, नारियल, चावल तथा अन्य पारंपरिक वस्तुओं का उपयोग किया गया। पूजा संपन्न होने के बाद उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से देवस्थल पर नमन किया और गांव की उन्नति के लिए प्रार्थना की।

इस अवसर पर क्षेत्र के प्रसिद्ध समाजसेवी एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए पहचान रखने वाले दलमा टाइगर सुकलाल पहाड़िया भी पूजा स्थल पर पहुंचे। उन्होंने पूजा-अर्चना में भाग लेते हुए देवस्थल पर माथा टेका तथा क्षेत्र की सुख-समृद्धि और लोगों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की परंपराएं प्रकृति संरक्षण और सामुदायिक एकता का संदेश देती हैं। ऐसी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित रखना समाज की जिम्मेदारी है।

सुकलाल पहाड़िया ने कहा कि आज के आधुनिक दौर में भी गांवों में पारंपरिक रीति-रिवाजों का निर्वहन समाज की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करता है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी संस्कृति, परंपरा और विरासत को समझें तथा आने वाली पीढ़ियों तक इसे पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

पूजा के उपरांत सभी श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद के रूप में खिचड़ी का वितरण किया गया। प्रसाद ग्रहण करने के लिए ग्रामीणों में उत्साह देखने को मिला। बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं सहित सभी लोगों ने सामूहिक रूप से प्रसाद ग्रहण किया। इससे गांव में सामाजिक एकता और भाईचारे की भावना और अधिक मजबूत हुई।

ग्रामीणों ने बताया कि जाताल पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सामुदायिक एकजुटता का भी प्रतीक है। इस आयोजन के माध्यम से लोग एक साथ मिलकर गांव और समाज के विकास की कामना करते हैं। पूजा के दौरान गांव के बुजुर्गों ने युवा पीढ़ी को परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों के महत्व के बारे में भी जानकारी दी।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कहा कि खेती-किसानी ग्रामीण जीवन का आधार है और अच्छी फसल किसानों के जीवन में खुशहाली लेकर आती है। इसलिए हर वर्ष पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इस पूजा का आयोजन किया जाता है, ताकि प्रकृति और देव शक्तियों का आशीर्वाद प्राप्त हो सके।

पूजा कार्यक्रम में गांव एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर आयोजन को सफल बनाने में योगदान दिया। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक सद्भाव, आपसी सहयोग और सांस्कृतिक एकता का सुंदर उदाहरण देखने को मिला।

इस अवसर पर वार्ड सदस्य मलिंद्र उरांव,गुरुचरण कर्मकार, कर्णराज प्रमाणिक,सोनू पहाड़िया,भमर पहाड़िया, जितू पहाड़िया, बैद्यनाथ सिंह सरदार सहित कई गणमान्य ग्रामीण उपस्थित थे। सभी ने पूजा की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए क्षेत्र के विकास, शांति और समृद्धि की कामना की।

ग्रामीणों का मानना है कि इस प्रकार के पारंपरिक धार्मिक आयोजन न केवल लोगों की आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि समाज को एकजुट रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जाताल पूजा के सफल आयोजन से आसनबनी गांव में उत्साह और उल्लास का माहौल देखने को मिला तथा लोगों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं।