ईचागढ़ के पूर्व प्रत्याशी सह केंद्रीय उपाध्यक्ष तरुण महतो के स्वागत में समर्थकों ने निकाली  बाइक रैली।
चांडिल/: भाषा आंदोलन, खतियानी आधारित स्थानीय नीति और झारखंडी अधिकारों की लड़ाई को मजबूती से उठाने वाले साथियों के साथ JLKM के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष एवं ईचागढ़ विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी तरुण महतो लगभग सात माह बाद जेल से रिहा होकर अपने क्षेत्र की जनता के बीच लौटे।
उनकी रिहाई के अवसर पर समर्थकों, कार्यकर्ताओं और क्षेत्रवासियों ने पूरे ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में भव्य सम्मान सह बाइक रैली निकालकर उनका स्वागत किया। रैली में बड़ी संख्या में युवाओं, किसानों, मजदूरों एवं आम जनता की सहभागिता देखने को मिली। समर्थकों ने इसे जनता के विश्वास, स्नेह और संघर्ष के प्रति सम्मान का प्रतीक बताया।
ज्ञात हो कि तरुण महतो लंबे समय से क्षेत्र में हो रहे अवैध बालू कारोबार, सिंडिकेट व्यवस्था तथा उससे प्रभावित छोटे ट्रैक्टर मालिकों और मजदूरों की समस्याओं को लेकर लगातार आवाज उठाते रहे हैं। उनके समर्थकों का आरोप है कि क्षेत्र में बालू के अवैध कारोबार के खिलाफ उनके मुखर विरोध और जनहित के मुद्दों पर सक्रियता के कारण उन्हें इस लड़ाई से दूर रखने के लिए साजिशन फंसाया गया तथा जेल भेज दिया गया। समर्थकों का मानना है कि यह कार्रवाई उनकी जनहित की आवाज को दबाने का प्रयास था, लेकिन इसके बावजूद क्षेत्र की जनता का विश्वास और समर्थन उनके साथ बना रहा।
करीब सात माह तक जेल में रहने के बाद रिहा हुए तरुण महतो ने कहा कि अपने क्षेत्र की भगवान तुल्य जनता के बीच लौटकर वे भावुक और उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि जनता का प्रेम, विश्वास और आशीर्वाद ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उनका एकमात्र उद्देश्य क्षेत्र की जनता के हितों की रक्षा करना, उन्हें न्याय दिलाना और हर सुख-दुख में उनके साथ खड़ा रहना है।
उन्होंने कहा कि वे आगे भी मजदूरों, किसानों, युवाओं और आम जनमानस के हक एवं अधिकारों के लिए मजबूती से आवाज उठाते रहेंगे तथा क्षेत्र की हर समस्या के समाधान के लिए सदैव तत्पर रहेंगे। उन्होंने कहा कि जनसेवा और न्याय की लड़ाई ही उनके राजनीतिक जीवन का मुख्य उद्देश्य है।
 तरुण महतो ने अपनी धर्मपत्नी भानुमति महतो के योगदान को विशेष रूप से याद करते हुए कहा कि उनकी अनुपस्थिति के दौरान उन्होंने क्षेत्र की जनता के बीच रहकर उनकी कमी को पूरा करने का हरसंभव प्रयास किया। लोगों की समस्याओं को सुनना, उनके समाधान के लिए प्रयास करना और जनता से निरंतर जुड़े रहना उनके द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल रहा।
उन्होंने भावुक होकर कहा, "मेरी धर्मपत्नी भानुमति महतो मेरे लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। उन्होंने मेरे हर सुख-दुख में मेरा साथ दिया है। मेरी अनुपस्थिति में भी उन्होंने अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन किया। आज यदि मुझमें संघर्ष करने का साहस और हिम्मत है तो उसमें मेरी पत्नी का बहुत बड़ा योगदान है।* "
तरुण महतो ने क्षेत्र की जनता, कार्यकर्ताओं, शुभचिंतकों एवं उन सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया जिन्होंने इस कठिन समय में उनका साथ दिया। उन्होंने कहा, "मैं उन सभी साथियों का हृदय से धन्यवाद करता हूं जो इस संघर्ष के दौर में मेरे और मेरे परिवार के साथ मजबूती से खड़े रहे। जनता का प्यार और आशीर्वाद ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी है। मैं आगे भी क्षेत्र की जनता के हर सुख-दुख में उनके साथ खड़ा रहूंगा और न्याय तथा जनहित की लड़ाई को पूरी ताकत के साथ जारी रखूंगा।"
उनकी रिहाई और सम्मान रैली को लेकर पूरे क्षेत्र में उत्साह का माहौल देखने को मिला तथा बड़ी संख्या में लोगों ने उनका स्वागत कर उनके प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया।