AIDSO ने कुलपति चाइबासा को ज्ञापन सौंपा
क्लस्टर मॉडल’ के नाम पर उच्च शिक्षा पर हमला बंद हो: AIDSO
कुलपति को ज्ञापन सौंपा, अधिसूचना वापस न लेने पर आंदोलन की चेतावनी
चांडिल,ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन (AIDSO), कोल्हान राज्य परिषद ने कोल्हान विश्वविद्यालय द्वारा हाल ही में जारी महाविद्यालयों का ‘पुनर्गठन’ (Restructuring) एवं संकाय आधारित कॉलेज गठन(Cluster of college) संबंधी अधिसूचना का पुरजोर विरोध किया है। संगठन ने आज माननीय कुलपति महोदया के नाम ज्ञापन सौंपकर इस अधिसूचना को तत्काल वापस लेने की मांग की।
AIDSO का मानना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत विश्वविद्यालय के कॉलेजों को “स्ट्रीम वाइज” एवं “क्लस्टर ऑफ कॉलेज” मॉडल में बदलने की प्रक्रिया छात्रों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों के भविष्य पर गंभीर असर डालेगी। यह अधिसूचना शिक्षा के अधिकार पर हमला है और सरकारी कॉलेजों में बची-खुची उच्च शिक्षा को बर्बाद कर निजीकरण की ओर धकेलने की एक सोची-समझी साजिश है।
*ज्ञापन में उठाए गए मुख्य बिंदु:*
1. *विभागों को बंद करने की तैयारी*: ‘क्लस्टर ऑफ कॉलेज’ का तर्क देकर जमशेदपुर क्लस्टर, चाईबासा क्लस्टर में जमशेदपुर शहर, चाईबासा शहर तथा सरायकेला-खरसावां जिले के विभिन्न कॉलेजों के अलग-अलग विभागों एवं जमशेदपुर व चाईबासा के बाहर के कॉलेजों के विभागों को बंद करने की तैयारी है, जहाँ छात्रों की संख्या कम है। जबकि छात्रों की कम संख्या का मुख्य कारण विश्वविद्यालय की विफलता है, न कि छात्रों की अरुचि। उन विभागों में स्थायी शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई है, आधारभूत संरचना की घोर कमी है, नियमित कक्षाएं नहीं होतीं।
2. *भाषा शिक्षा पर हमला*: कोल्हान जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र में जहां हो, कुरमाली, संथाली आदि भाषाओं को हर कॉलेज-विश्वविद्यालय तक पहुंचाने की जरूरत है, वहीं इन भाषाओं को महज कुछ कॉलेजों में स्थानांतरित कर भाषा शिक्षा को सीमित किया जा रहा है।
3. *पदों में कटौती*: अधिसूचना के अनुसार, ग्रुप-D के पदों को पूरी तरह खत्म करने और कई पुराने पदों को ‘सरेंडर’ करने की बात कही गई है। एक तरफ जहाँ हजारों युवा बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं, वहीं विश्वविद्यालय पक्की नियुक्तियों के बजाय आउटसोर्सिंग और अनुबंध (Contractual/MTS) को बढ़ावा दे रहा है।
4. *छात्राओं की सुरक्षा से समझौता*: ‘क्लस्टर’ व्यवस्था के तहत ग्रैजुएट कॉलेज जमशेदपुर और चाईबासा महिला कॉलेज सहित महिला महाविद्यालयों से छात्राओं को कई मुख्य विषयों और स्ट्रीम की पढ़ाई के लिए दूसरे को-एजुकेशन कॉलेजों में भेजने की तैयारी है। आज के असुरक्षित माहौल में उन्हें मजबूरन दूसरे कॉलेजों में भेजना उनकी सुरक्षा के साथ क्रूर मजाक है। साथ ही ग्रामीण और दूर-दराज के छात्रों को अपने पसंदीदा विषय पढ़ने के लिए एक कॉलेज से दूसरे कॉलेज भटकना पड़ेगा।
5. *शिक्षा का बाजारीकरण*: NEP-2020 की आड़ में ‘सेल्फ-फाइनेंस’ कोर्स और आउटसोर्सिंग को अनिवार्य बनाकर शिक्षा को बाजार बनाने की कोशिश की जा रही है, जिससे सिर्फ सीमित वर्ग के छात्र-छात्राएं ही पढ़ पाएंगे।
AIDSO का मानना है कि यह उच्च शिक्षा के विस्तार नहीं, बल्कि संकुचन की दिशा में कदम है। विश्वविद्यालय प्रशासन का यह तर्क हास्यास्पद है कि वह शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए क्लस्टर बना रहा है। वर्तमान में अधिकांश कॉलेज ‘घंटी आधारित’ (Guest Faculty) शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं। बिना स्थायी शिक्षकों, लैब सहायकों, आधारभूत संरचनाओं के ‘गुणवत्ता’ की बात करना छात्रों के साथ छलावा है।
*AIDSO की मांगें:*
1. सभी कॉलेज में पहले से चली आ रही विभाग कि पढ़ाई सभी कॉलेज में जारी रखा जाए एवं सभी विभाग के रिक्त पदों पर शिक्षकों की अविलंब नियुक्ति की जाए।
2. शिक्षा विरोधी क्लस्टर मॉडल की अधिसूचना को वापस लिया जाए।
3. विश्वविद्यालय एवं सभी कॉलेजों में वर्षों से लंबित शिक्षकों की बहाली और आधारभूत संरचना की कमी को जल्द पूरा किया जाए तथा सभी छात्र-छात्राओं का नामांकन सुनिश्चित किया जाए।
4. सिंहभूम कॉलेज चांडिल और काशी साहू कॉलेज सरायकेला में गृह विज्ञान कि पढ़ाई यथावत जारी रखा जाए और अविलंब दोनों कॉलेजों में गृह विज्ञान कि चांडिल में संथाली, सरायकेला में कुड़माली तथा मनोविज्ञान विभाग में स्थाई शिक्षक नियुक्त किया जाए ।
संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि मांगें पूरी नहीं की गईं तो कोल्हान के छात्र व्यापक और तीव्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी

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