विहंगम योग टाटा संत समाज द्वारा निकाली गई - "स्वर्वेद यात्रा"

विहंगम योग टाटा संत समाज द्वारा निकाली गई - "स्वर्वेद यात्रा"
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इसी क्रम में विहंगम योग टाटा संत समाज पूर्वी सिंघभूम एवं सरायकेला खरसावां जिला द्वारा संयुक्त रूप से बिस्टुपुर 8 जुबली रोड स्थित आश्रम से स्वर्वेद यात्रा निकाली गई, यात्रा चर्च स्कूल रोड गोलचक्कर, स्ट्रेट माइल रोड एवं मोदी मार्क होते हुए पुनः आश्रम पर आकर समाप्त हुई। यात्रा उपरांत महाप्रसाद से आयोजन का समापन हुआ।
यात्रा में स्वर्वेद प्रचार रथ एवं बैड बाजा के साथ सैकड़ों की संख्या में उपस्थित विहंगम योग के अनुयायी हाथों में स्वर्वेद एवं "अ" अंकित श्वेत ध्वजा लेकर जयकारा लगा रहे थे।
ज्ञात हो कि विहंगम योग के प्रणेता, अमर हिमालय योगी, अनन्त श्री सद्गुरु सदाफलदेव जी महाराज की अमूल्य कृति ‘स्वर्वेद’ अध्यात्म जगत का अद्वितीय सद्ग्रन्‍थ है। यह हिमालय की कन्दरा में, योग-समाधि अवस्था में प्राप्त अनुभवों की अभिव्यक्ति है। स्वर्वेद- (स्वः+वेद) का शाब्दिक अर्थ है, आत्मा एवं परमात्मा का यथार्थ ज्ञान।
स्वर्वेद के दोहों के पठनमात्र से हमारे शुभ संस्कार जागृत होने लगते हैं, अशुभ वृत्तियों का नाश होने लगता है। जीवन के हर मोड़ पर स्वतः दिशा-बोध होने लगता है। स्वर्वेद हमारी साधना में भी विशेष रूप से सहयोगी है।
मानवता के सम्यक् विकास के लिए स्वर्वेद का प्रचार बहुत जरूरी है। अध्यात्म मानव जीवन की अपरिहार्य आवश्यकता है। इसके बिना हम जीवन में दिशाविहीन होकर अनेक कष्ट पाते हैं। इस उद्देश्य के साथ सम्पूर्ण विश्व में भारतीय नववर्ष को एक साथ-एक समय-एक दिन स्वर्वेद यात्रा का आयोजन किया जाता है।यात्रा में सरायकेला खरसांवा संयोजक शंभु पंडित, कार्यालय प्रमुख कुबेर शर्मा, प्रचारक पंडित योगेंद्र नाथ पाण्डेय, उपदेष्टा आशा पाण्डेय, उमेश यादव, अनिल सिंह, रोहित कुमार, गोस्वामी जी, महावीर अग्रवाल, सुशील शर्मा, भीमराज अग्रवाल, नागेंद्र चौधरी, चंदन कुमार, बबन प्रसाद, रीना पाण्डेय, पूनम सिंह, अन्नपुर्णा देवी, बबीता अग्रवाल, नागेंद्र शर्मा, दक्षिणी झारखण्ड के युवा समाज कल्याण प्रभारी रवि सिंह एवं पुरोहित महावीर विद्यार्थी के संग सैकड़ों कि संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए।


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