चांडिल डैम के फाटक खोलने में दोहरी नीति बर्दाश्त नहीं : राकेश रंजन महतो।
चांडिल डैम से प्रभावित 116 गांवों के विस्थापितों के साथ हो रहे अन्याय को लेकर विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने गहरी चिंता और आक्रोश व्यक्त किया है।
राकेश रंजन महतो ने कहा कि चांडिल बहुउद्देशीय परियोजना का निर्माण हुए लगभग 43 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन इन वर्षों में अपेक्षित विकास के बजाय 116 गांवों के विस्थापन और लगातार हो रहे नुकसान की पीड़ा ही सामने आई है। जिन लोगों ने अपनी जमीन और घर देकर इस परियोजना को संभव बनाया, आज वही लोग हर वर्ष डूब और तबाही का सामना करने को मजबूर हैं।
उन्होंने बताया कि 24 मार्च 2026 को बिना किसी विशेष परिस्थिति और बिना बारिश के भी डैम का जलस्तर लगभग 179.70 RL रहने के बावजूद दो फाटक लगभग 40 सेंटीमीटर खोल दिए गए। इस संबंध में जब विभागीय पदाधिकारी से जानकारी ली गई तो बताया गया कि जमशेदपुर के पत्रकारों के फोन आने पर फाटक खोला गया।
राकेश रंजन महतो ने कहा कि यह बेहद चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है। जब डैम से प्रभावित 116 गांवों के लोग हर वर्ष डूब का सामना करते हैं, उनके घर गिरते हैं और किसानों की फसलें बर्बाद होती हैं, तब फाटक खोलने की मांग पर विभाग यह कहकर मना कर देता है कि जलस्तर 180 RL हर हाल में बनाए रखना है। लेकिन जब टाटा शहर या टाटा कंपनी के लिए पानी की जरूरत होती है, तब नियम-कानूनों को नजरअंदाज कर दिया जाता है।
उन्होंने कहा कि जिन विस्थापितों की जमीन पर यह डैम बना और जिनकी कुर्बानी के कारण टाटा शहर के घर-घर पानी पहुंच रहा है, उन्हीं विस्थापितों की पीड़ा और मांगों को लगातार अनदेखा किया जा रहा है। यह स्थिति न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है।
राकेश रंजन महतो ने यह भी कहा कि यदि आस्था के पर्व छठ के नाम पर फाटक खोला जा सकता है, तो टुसू पर्व और छाता पोखर मेला के लिए जलस्तर कम करने के लिए दिए गए आवेदन और मांगों को नजरअंदाज करना स्पष्ट रूप से दोहरी नीति को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि 116 गांवों के विस्थापित एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ें। यदि विभाग और सरकार विस्थापितों की समस्याओं और मांगों को गंभीरता से नहीं लेती है, तो आने वाले समय में विस्थापितों को बड़े जन आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
राकेश रंजन महतो ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि विस्थापितों के साथ यही दोहरी नीति और अन्याय जारी रहा, तो आंदोलन तेज किया जाएगा और *विस्थापित यह फैसला लेने को मजबूर होंगे कि चांडिल डैम का फाटक हमेशा के लिए बंद कर दिया जाए, ताकि डैम से एक बूंद पानी भी नीचे नहीं जाने दिया जाए।v
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