कुपोषण नियंत्रण एवं मातृ-शिशु स्वास्थ्य प्रबंधन को लेकर कार्यशाला आयोजित।

कुपोषण नियंत्रण एवं मातृ-शिशु स्वास्थ्य प्रबंधन को लेकर कार्यशाला आयोजित।


उपायुक्त की उपस्थिति में कुपोषण नियंत्रण एवं मातृ-शिशु स्वास्थ्य प्रबंधन को लेकर कार्यशाला आयोजित।

उपायुक्त, सरायकेला-खरसावां श्री नितिश कुमार सिंह की उपस्थिति में मातृ एवं शिशु में कुपोषण की दर में कमी लाने तथा बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से Wheels Global Foundation द्वारा संचालित MIYCN Project के तहत एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन समाहरणालय सभागार, सरायकेला में किया गया।
कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त श्रीमती रीना हांसदा, सिविल सर्जन सरयू प्रसाद राय, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी श्रीमती सत्या ठाकुर, उपाधिक्षक सदर अस्पताल समेत सभी MOIC, DPM, BPM, GNM, स्टाफ नर्स एवं ANM ने भाग लिया।

कार्यशाला में Wheels Global Foundation की टीम द्वारा प्रतिभागियों को मातृ एवं शिशु पोषण, कुपोषण की रोकथाम, देखभाल एवं बेहतर प्रबंधन से संबंधित विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इस दौरान नवजात शिशुओं के लिए प्रारंभिक एवं अनन्य स्तनपान के महत्व, उचित स्तनपान की सही विधि एवं तकनीक, स्तनपान कराने के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों, गर्भवती एवं धात्री महिलाओं के संतुलित आहार, बच्चों में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, आयरन, विटामिन एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की आवश्यकता तथा कुपोषण से बचाव के उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास में संतुलित पोषण की भूमिका, स्वच्छता एवं नियमित स्वास्थ्य जांच के महत्व, गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान एवं समय पर उपचार, पूरक आहार की सही विधि तथा समुदाय स्तर पर जन-जागरूकता बढ़ाने के संबंध में भी आवश्यक जानकारी प्रदान की गई।

उपायुक्त श्री नितिश कुमार सिंह ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि कुपोषण उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग का दायित्व नहीं है, बल्कि इससे संबंधित सभी विभागों को आपसी समन्वय एवं सहभागिता के साथ कार्य करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, समाज कल्याण, पेयजल एवं स्वच्छता, शिक्षा तथा अन्य संबंधित विभागों के संयुक्त प्रयास से ही मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार लाया जा सकता है।
उपायुक्त ने सभी स्वास्थ्यकर्मियों एवं अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में विशेष जागरूकता अभियान चलाते हुए गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं एवं बच्चों तक पोषण संबंधी आवश्यक जानकारी पहुंचाना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि कुपोषण मुक्त जिला बनाने हेतु जमीनी स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग, जन-जागरूकता एवं सामुदायिक सहभागिता अत्यंत आवश्यक है।

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