झिमड़ी गांव में मोहर्रम पर्व पुलिस प्रशासन के निगरानी में मनाया गया।

झिमड़ी गांव में मोहर्रम पर्व पुलिस प्रशासन के निगरानी में मनाया गया।चांडिल, चांडिल अनुमंडल के नीमडीह थाना क्षेत्र के अधीन झिमड़ी गांव,सिंदुरपुर मुरु गांव में मोहर्रम पर्व मनाया गया।झिमड़ी मुरू सिंदुरपुर में पुलिस गश्ती करते हुए।इस अवसर पंचायत के मुखिया, पंचायत जनप्रतिनिधि आस पास के शांति समिति के सदस्य, पुलिस प्रशासन की देखरेख में मोहर्रम पर्व मनाया गया। पुलिस प्रशासन के निगरानी में मोहर्रम पर्व का विधि विधान पुरा हुआ।इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना और साल के चार सबसे पवित्र महीनों में से एक है। इसके दसवें दिन को 'आशूरा' कहते हैं । यह महीना पैगंबर हजरत मुहम्मद के नवासे, इमाम हुसैन और उनके साथियों की कर्बला की जंग में हुई शहादत की याद में शोक और बलिदान के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।मुहर्रम के दौरान विभिन्न समुदायों और संप्रदायों द्वारा इसे अलग-अलग तरीकों से देखा और मनाया जाता है।

मुहर्रम से किमवंदित जुड़े बातें कुछ लोग का कहना है कि
कर्बला की शहादत: 680 ईस्वी में कर्बला (इराक) के मैदान में यज़ीद नामक शासक के खिलाफ लड़ते हुए इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। उन्होंने इस्लाम और इंसानियत की रक्षा के लिए यह बलिदान दिया था ।शिया समुदाय: शिया मुसलमान मुहर्रम के पहले 10 दिनों तक शोक मनाते हैं । इस दौरान वे सादे कपड़े पहनते हैं, खुशी के आयोजनों से दूर रहते हैं, जुलूस निकालते हैं और कर्बला के शहीदों को याद करते हुए उपवास या दान करते हैं।
सुन्नी समुदाय: सुन्नी मुसलमान इस महीने को विशेष रूप से इबादत, कुरान की तिलावत और रोज़े (विशेषकर 9वीं और 10वीं मुहर्रम को) रखकर गुजारते हैं। इस दिन को पैगंबर मूसा (Moses) और उनके अनुयायियों की फिरौन से मुक्ति का दिन भी माना जाता है।
भारत सहित कई देशों में इस महीने की शुरुआत में इमाम हुसैन की याद में 'ताज़िया' (Tazia) निकाले जाते हैं, जो कर्बला के मकबरे की प्रतिकृति होते हैं।
मुहर्रम का इतिहास और महत्व
मुहर्रम और आशूरा का विस्तृत इतिहास।
पारंपरिक अनुष्ठानों के बारे में।
क्या आप मुहर्रम के दौरान होने वाली धार्मिक मान्यताओं, भारत में निकलने वाले जुलूसों की परंपरा, या कर्बला के युद्ध के ऐतिहासिक विवरण के बारे में और अधिक जानना चाहते हैं?

इसकी शुरुआत 17 जून से हुई है। मुस्लिम समाज में इसे शोक, त्याग और बलिदान के प्रतीक के रूप में माना जाता है। .
मुहर्रम के त्योहार को लेकर गांव में तासे की आवाज गूंजने लगी है। मातम के इस त्योहार की शुरुआत शनिवार की शाम केला कट्टी के साथ प्रारंभ हो गया। जिसका पहलाम 26 जून को होगा। इस दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग निशान व तजिये के साथ जुलूस निकालकर लाठी डंडे फरसे का खेल दिखाते हुए कर्बला मैदान पहुचकर निशान का पहलाम करते है। बताया जाता है कि यजीद के साथ हुई लड़ाई में इमामे हुसैन की हत्या कर दी गई थी। उन्ही की यादों में यह त्योहार मातम के रूप में मनाया जाता है।


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