दलमा में ग्रामसभा सशक्तिकरण पर मंथन, पेशा व वनाधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की उठी मांग

चांडिल,दलमा में ग्रामसभा सशक्तिकरण पर मंथन, पेशा व वनाधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की उठी मांग।
चांडिल,पर्यटन परियोजनाओं पर उठे सवाल, इको सेंसिटिव जोन में निर्माण कार्यों की निष्पक्ष जांच की मांग।
कोल्हान(जमशेदपुर) : दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी क्षेत्र के माकुलाकोचा सामुदायिक भवन में शुक्रवार को ग्रामसभा सशक्तिकरण के उद्देश्य से पेसा अधिनियम-1996 एवं वनाधिकार अधिनियम-2006 विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। सामुदायिक वनपालन संस्थान, रांची के सौजन्य से आयोजित इस कार्यक्रम में दलमा क्षेत्र की विभिन्न ग्रामसभाओं के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आदिवासी संगठनों के पदाधिकारियों ने भाग लेकर ग्रामसभा के अधिकारों, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा संवैधानिक प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन पर गंभीर चर्चा की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता माकुलाकोचा के ग्रामप्रधान जयनाथ सिंह सरदार एवं रूपाय सिंह सरदार ने संयुक्त रूप से की, जबकि संचालन रविन्द्र सिंह ने किया।

ग्रामसभा को संवैधानिक अधिकारों की जानकारी दी गई

संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा केवल एक औपचारिक संस्था नहीं, बल्कि स्थानीय स्वशासन की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है। पेसा कानून के तहत ग्रामसभा को प्राप्त अधिकारों, प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन, विकास योजनाओं में सहभागिता तथा निर्णय लेने की प्रक्रिया पर विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही वनाधिकार अधिनियम-2006 के तहत व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वनाधिकारों के संरक्षण और उनके दावों की प्रक्रिया पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

दलमा में पर्यटन परियोजनाओं पर उठे सवाल

संगोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी क्षेत्र में पर्यटन एवं विकास के नाम पर जंगलों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उनका कहना था कि वन संरक्षण और वन्यजीवों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, लेकिन वर्तमान में विकास कार्यों के नाम पर जंगलों में निर्माण गतिविधियां बढ़ रही हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब दलमा क्षेत्र को इको सेंसिटिव जोन घोषित किया जा चुका है, तब जंगलों के भीतर विभिन्न निर्माण कार्य किस नियम और अनुमति के तहत कराए जा रहे हैं। वक्ताओं ने मांग की कि इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराई जाए तथा ग्रामसभा की सहमति के बिना किसी भी विकास योजना को लागू नहीं किया जाए।

स्थानीय लोगों को मिले रोजगार का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग

वक्ताओं ने कहा कि भारत सरकार की अधिसूचना के अनुसार इको सेंसिटिव जोन क्षेत्र के स्थानीय निवासियों को स्वरोजगार एवं आजीविका के अवसर उपलब्ध कराए जाने चाहिए। उन्होंने मांग की कि वन विभाग यह सार्वजनिक करे कि अब तक दलमा क्षेत्र के कितने स्थानीय लोगों को रोजगार अथवा स्वरोजगार उपलब्ध कराया गया है। साथ ही विकास योजनाओं में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने तथा ठेकेदारी व्यवस्था में बाहरी लोगों के बजाय स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने की भी मांग की गई।

प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए ग्रामसभा को मजबूत करने का आह्वान

संगोष्ठी में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा तभी संभव है जब ग्रामसभाएं संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक हों और विकास योजनाओं में उनकी सहभागिता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने दलमा क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण, वनाधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन तथा ग्रामसभा की स्वायत्तता को मजबूत बनाने के लिए संयुक्त रूप से कार्य करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से सुखलाल पहाड़िया, रविन्द्र सरदार, हरीश चंद्र भूमिज, करमू मार्डी, जागरण पाल, धर्मेश, जेवियर कुजूर, सोहनलाल कुम्हार, सूर्यमणी भगत, राजेश महतो, बृहस्पति सिंह सरदार, जयनाथ सिंह सरदार, शंकर सिंह सरदार, बसंती सरदार, सविता सोरेन, सुखदेव कर्मकार, जितु पहाड़िया, गुरुचरण कर्मकार सहित विभिन्न ग्रामसभाओं के प्रतिनिधि एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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