ए आई डी एस ओ द्वारा किसान विरोधी नीति पर चल रहे आंदोलन पर एकजुटता की अपील की गई


AIDSO के महासचिव सौरव घोष ने देशभर में हो रहे किसान आंदोलन के समर्थन में निम्नलिखित प्रेस बयान जारी किया है और 3 से 10 दिसंबर तक राष्ट्रव्यापी छात्र एकजुटता सप्ताह मनाने का आह्वान किया है।                         
                           प्रेस बयान
AIDSO संघर्षरत किसानों के साथ एकजुट होकर खड़ा है
AIDSO के महासचिव सौरव घोष ने कहा है कि 26 नवंबर 2020 से किसानों और देश भर के कृषक नई दिल्ली तक मार्च निकाल रहे हैं। प्रदर्शनकारियों को सरकार और पुलिस की क्रूरता के प्रकोप का सामना करना पड़ा है! कहने की जरूरत नहीं है,  वे किसानों द्वारा लंबे समय से की जा रही त्रृण माफ, फसलों की कीमतों में कम से कम 50% की वृद्धि, और कृषि सामानों की कीमतें कम करने की मांगों  को नजरअंदाज करते हुए सरकार द्वारा "वन नेशन, वन मार्केट" और ऐसे अन्य लफ्फाजी के नाम पर लाए गए प्रो-कॉर्पोरेट फार्म कानून के खिलाफ लड़ रहे हैं। आवश्यक वस्तु संशोधन अधिनियम, कृषि उपज विपणन समिति (APMC) अधिनियम, अनुबंध खेती, बिजली बिल आदि ने लोगों में जबरदस्त असंतोष पैदा किया है।
        पूरा देश अभी भी COVID-19 की महामारी से जूझ रहा है, जहां लाखों लोग गहरे संकट एवं अभाव में डूबे हुए हैं। केंद्र सरकार की निंदनीय कदम ने आर्थिक रूप से त्रस्त मजदूर और गरीब जनता को रसातल पर पहुंचा दिया है। सरकार को इन असहाय लोगों के साथ खड़े होकर उन्हें सहारा देना चाहिए था लेकिन इसके विपरीत, हमारी सरकारें कॉरपोरेट घरानों और पूंजीपतियों की  कठपुतली बन गई हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, रेलवे, परिवहन आदि जैसे सेवा क्षेत्र के निजीकरण के बाद अब कृषि को भी निजी हाथों में देने की पूरी कोशिश है। किसान को 'अन्नदाता' और कृषि को 'हमारे राष्ट्र की रीढ़' कहा जाता है। लेकिन जब वे न्याय और अधिकार के लिए उठ खड़े हुए, तब अधिकारियों द्वारा किसानों को उनके आजीविका के बुनियादी साधनों से दूर करने के लिए चालाकी से साजिश रच कर उन्हें  गुमराह किया जा रहा है। 
        जब आंदोलन की ताकत बढ़ी, इसमें शामिल होने वाले किसानों की संख्या बढ़ी तब आंदोलन को कुचलने के लिए मुनाफाख़ोर शासक वर्ग, पूँजीपतियों और सत्ता-लोभी दलों ने आंदोलन को कुचलने के लिए रास्ते में गड्ढे खोदे, बैरिकेड्स बनाया, धारा 144 लागू की, परिवहन सेवा को रोका, हजारों किसानों और नेताओं को आधी रात में हिरासत में ले लिया, स्टेडियमों को जेलों में बदलने का प्रयास किया! इससे भी वे आंदोलन को रोक नहीं पाये,पुलिस ने बर्बरता के साथ आंदोलनकारियों पर इस चिलचिलाती ठंड में वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और आंसू गैस छोड़े!
    एआईडीएसओ प्रदर्शनकारी किसानों, श्रमिकों एवं वास्तविक राष्ट्र निर्माताओं पर हमले की कड़ी निंदा करता है
और छात्रों-युवाओं से मेहनतकश जनता के इस ऐतिहासिक आंदोलन के साथ खड़े रहने का आह्वान करता है। एआईडीएसओ ने इस किसान आंदोलन के समर्थन में 3 से 10 दिसंबर तक  'राष्ट्रव्यापी छात्र एकजुटता सप्ताह’ मनाने का आह्वान किया है और सभी आम जन विशेष रूप से, छात्रों से इस कार्यक्रम को सफल करने आग्रह किया है।

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