सुरक्षित इंटरनेट उपयोग , साइबर अपराध से बचाव हेतु सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला संपन्न हुआ।

सुरक्षित इंटरनेट उपयोग , साइबर अपराध से बचाव हेतु सभागार में एक दिवसीय कार्यशाला संपन्न हुआ।

1930 हेल्पलाइन पर त्वरित शिकायत से साइबर ठगी की राशि बचाना संभव उपायुक्त, सरायकेला–खरसावां।
चांडिल, सरायकेला खरसावां जिला कार्यालय परिसर में साइबर अपराधों की बढ़ती घटनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने सुरक्षित इंटरनेट उपयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सेफर इंटरनेट दिवस के अवसर पर मंगलवार को समाहरणालय सभागार, सरायकेला में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम “Smart Tech, Safe Choices: Exploring the Safe and Responsible Use of AI” (स्मार्ट तकनीक, सुरक्षित विकल्प: आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के सुरक्षित एवं जिम्मेदार उपयोग) थीम पर आधारित था।कार्यशाला का शुभारंभ उपायुक्त नितिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में किया गया। कार्यशाला में मुख्य रूप से अनुमंडल पदाधिकारी, चांडिल विकास कुमार राय, जिला आपूर्ति पदाधिकारी, जिला सूचना विज्ञान पदाधिकारी, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।
उपायुक्त द्वारा अपने संबोधन में सुरक्षित इंटरनेट उपयोग, साइबर अपराध के विभिन्न प्रकारों एवं उनसे बचाव के उपायों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी फर्जी मोबाइल ऐप डाउनलोड कराकर बैंक खाते खाली कर देते हैं, लॉटरी अथवा इनाम का झांसा देकर ठगी करते हैं, गूगल सर्च के माध्यम से फर्जी कूरियर सर्विस के नाम पर धोखाधड़ी करते हैं, ओएलएक्स जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सामान बेचने या खरीदने के नाम पर ठगी करते हैं तथा बड़ी कंपनियों के नाम का दुरुपयोग कर ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड को अंजाम देते हैं। इसके अतिरिक्त परिजन की गिरफ्तारी का भय दिखाकर तथा ऑनलाइन गेमिंग के माध्यम से अधिक पैसे कमाने का लालच देकर भी साइबर ठगी की जाती है।उपायुक्त द्वारा यह भी बताया गया कि साइबर फ्रॉड की घटना होने के बाद के प्रारंभिक 2 से 3 घंटे अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं, जिसे गोल्डन आवर कहा जाता है। इस अवधि में त्वरित कार्रवाई कर ठगी की गई राशि को सुरक्षित किया जा सकता है। उन्होंने अपील की कि साइबर ठगी की स्थिति में बिना किसी विलंब के तुरंत 1930 साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर पर कॉल कर अथवा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई जाए।
उपायुक्त ने सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग पर विशेष बल देते हुए बताया कि व्हाट्सएप सहित अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से आने वाले अनजान लिंक, फर्जी संदेश एवं प्रमोशनल कॉल से सतर्क रहने की आवश्यकता है। किसी भी संदिग्ध लिंक को खोलने, अनजान कॉल पर प्रतिक्रिया देने अथवा व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से बचने की अपील की गई।अपने संबोधन के क्रम में उपायुक्त द्वारा उपस्थित पदाधिकारियों एवं कर्मियों से यह अनुरोध भी किया गया कि वे स्वयं साइबर अपराधों के प्रति सजग रहने के साथ-साथ अपने घर, मोहल्ले एवं आसपास के लोगों को भी साइबर ठगी से बचाव के उपायों की जानकारी देकर उन्हें जागरूक एवं प्रेरित करें, ताकि साइबर अपराधियों के प्रयासों को समय रहते विफल किया जा सके।कार्यशाला में पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) प्रदीप उरांव द्वारा अपने संबोधन में बताया गया कि साइबर अपराधी डिजिटल अरेस्ट, फिशिंग लिंक, फर्जी निवेश योजनाओं, सोशल मीडिया संदेशों एवं कॉल के माध्यम से लोगों को ठगने का प्रयास करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि डिजिटल अरेस्ट जैसी किसी भी स्थिति में घबराने की आवश्यकता नहीं है तथा ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर तुरंत 112 पर कॉल कर स्थानीय पुलिस को सूचना दी जानी चाहिए।पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) द्वारा यह भी अवगत कराया गया कि किसी भी बैंक द्वारा फोन कॉल, संदेश अथवा सोशल मीडिया के माध्यम से आधार नंबर, पैन कार्ड, बैंक खाता विवरण, ओटीपी अथवा अन्य गोपनीय जानकारी नहीं मांगी जाती है। यदि इस प्रकार का कोई कॉल, संदेश अथवा लिंक प्राप्त होता है, तो उस पर कोई कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए तथा तुरंत नजदीकी बैंक शाखा से संपर्क कर स्थिति की पुष्टि करनी चाहिए।वहीं साइबर थाना प्रभारी द्वारा साइबर अपराध के विभिन्न प्रकारों की जानकारी देते हुए बताया गया कि ओटीपी, पिन, आधार कार्ड, पैन कार्ड अथवा बैंक से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी अनजान व्यक्तियों के साथ साझा नहीं की जाए। अनजान नंबरों से आने वाले व्हाट्सएप कॉल, वीडियो कॉल एवं अंतरराष्ट्रीय कॉल रिसीव करने से बचें, सार्वजनिक वाई-फाई का उपयोग बैंकिंग लेन-देन के दौरान न करें तथा अनजान क्यूआर कोड स्कैन न करें।कार्यशाला के दौरान आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग, साइबर थ्रेट्स, ऑनलाइन फ्रॉड, डीपफेक, व्हाट्सएप सिक्योरिटी एवं डिजिटल अरेस्ट जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।इसके अतिरिक्त, कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त द्वारा उपस्थित पदाधिकारियों एवं कर्मियों को सेफर इंटरनेट दिवस के अवसर पर सुरक्षित एवं जिम्मेदार इंटरनेट उपयोग की शपथ भी दिलाई गई। शपथ के माध्यम से सभी को आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया एवं डिजिटल प्लेटफॉर्म का विवेकपूर्ण, सुरक्षित एवं कानून सम्मत उपयोग करने, फर्जी लिंक व प्रमोशनल कॉल से सावधान रहने तथा अपने कार्यक्षेत्र एवं आसपास के लोगों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने हेतु प्रतिबद्ध किया गया।कार्यक्रम में पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय), कार्यपालक दंडाधिकारी, सरायकेला, साइबर थाना प्रभारी, सीएससी मैनेजर, ई-जिला प्रबंधक, डीपीओ (यूआईडी), कंप्यूटर ऑपरेटर, वीएलई सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, कार्यालय प्रधान एवं कर्मी उपस्थित थे। 

Post a Comment

0 Comments

close