संविधान बचाओ दिवस सम्मान पूर्वक मनाया
चांडिल,राहे में संविधान निर्माता डॉ भीमराव अम्बेडकर की जयंती के अवसर पर संविधान बचाओ दिवस सम्मान पूर्वक मनाया गया, संविधान एवं लोकतंत्र की रक्षा का लिया गया शपथ।अंबेडकर के रास्ते ही समता, भाईचारा, धर्मनिरपेक्षता की रक्षा तथा लूट, घोटाला, भ्रष्टाचार, नफरत व भेदभाव को मिटाया जा सकता है - सुफल महतो राज्य किसान सभा के तत्वावधान में संविधान निर्माता डॉ भीमराव अम्बेडकर की जयंती के अवसर पर संविधान बचाओ दिवस शहीद बिरसा मुंडा चौक नुरू एवं राहे में सम्मान पूर्वक मनाया गया एवं संविधान व लोकतंत्र की रक्षा का लिया गया शपथ। मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए झारखंड राज्य किसान सभा के महासचिव सुफल महतो ने संविधान निर्माता डॉ भीमराव अम्बेडकर अंबेडकर की जीवनी पर विस्तृत रूप से चर्चा करते हुए कहा डा भीमराव अम्बेडकर के रास्ते ही समानता, भाईचारा, धर्मनिरपेक्षता की रक्षा तथा लूट, घोटाला, भ्रष्टाचार, नफरत व भेदभाव को मिटाया जा सकता है। दलितों, किसान -मजदूरों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए जातिप्रथा, छुआछूत और सामाजिक असमानता के खिलाफ उनके अधुरे संघर्ष को जारी रखना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी। शिक्षित बनो, संगठित हो, संघर्ष करो का नारा आज़ और प्रसांगिक हो गया है।वे मानते थे कि जबतक समाज में समानता और सम्मान नहीं होगा तब तक सच्चा लोकतंत्र संभव नहीं है। उन्होंने मनुस्मृति को जला कर देश के लिए भविष्य के ख़तरे को उजागर कर दिया था। श्रीं महतो ने कहा भारत में 1 प्रतिशत लोगों के हाथ में 40 प्रतिशत संपत्ति असमानता की गहरी होती खाई तथा बढ़ती नफरत की राजनीति देश के लिए सबसे ख़तरनाक है।इस अवसर पर झारखंड राज्य किसान कौंसिल सदस्य जयपाल सिंह मुंडा, पूर्व जिला परिषद सदस्य रंगोवती देवी,अंचल किसान नेता श्रवण मुंडा,मदन मुंडा, शिवचरण पाहान, कार्तिक मुंडा,संजय मुंडा धनसिह मुंडा, मनसा मुंडा,निलकांत मुंडा, शंकर मुंडा,रथु मुंडा,शिवकेतु अहिर, बिष्णु कुम्हार, राजेंद्र अहिर, कृष्ण मुंडा, बुद्धेश्वर मुंडा,रतन मुंडा,कालीपद मुंडा, लक्ष्मी कान्त मुंडा,बिनोद साव,सुषेण हजाम, जनमेजय साव, माधव हरिजन, हा़डू हरिजन सहित अन्य लोग उपस्थित थे। संविधान निर्माता डॉ भीमराव अम्बेडकर जयंती अमर, डा भीमराव अम्बेडकर अमर रहे,संविधान व लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष तेज करो, देश किसी के मर्जी पर नहीं- देश चलेगा संविधान पर , नफरत, भेदभाव, छूआछूत,असामनता नहीं चलेगा आदि नारे लग रहे थे।

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