लाह कृषकों हेतु एक दिवसीय तकनीकी प्रशिक्षण एवं टूल-किट वितरण कार्यक्रम का हुआ आयोजन।
चांडिल, खरसावां जिला के नीमडीह प्रखंड के हेवन एवं लाकड़ी लैंपस में 200 लाह कृषकों हेतु एक दिवसीय तकनीकी प्रशिक्षण एवं टूल-किट वितरण कार्यक्रम का हुआ आयोजन। संनद् रहे कि
उन्नत तकनीक के माध्यम से लाह उत्पादन में वृद्धि एवं कृषकों को आत्मनिर्भर बनाने हेतु किया गया प्रोत्साहित, अन्य किसानों को भी योजनाओं से जोड़ने की गई अपील।
उपायुक्त, सरायकेला-खरसावां श्री नितिश कुमार सिंह के निर्देशानुसार जिले के कृषकों की आय में वृद्धि करने तथा उन्हें सशक्त बनाने के उद्देश्य से विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया जा रहा है। इसी क्रम में आज नीमडीह प्रखंड अंतर्गत हेवन एवं लाकड़ी लैंपस के 200 लाह कृषकों हेतु एक दिवसीय तकनीकी प्रशिक्षण एवं टूल-किट वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लाह उत्पादन को वैज्ञानिक आधार देकर किसानों को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाना है।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान उपस्थित कृषकों को लाह उत्पादन की आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीकों से विस्तारपूर्वक अवगत कराया गया। विशेषज्ञों द्वारा उत्तम किस्म के बीहन लाह के चयन, कीट नियंत्रण तथा लाह के पौधों के उचित रखरखाव के संबंध में तकनीकी जानकारी साझा की गई। किसानों को प्रेरित किया गया कि वे पारंपरिक विधियों के स्थान पर उन्नत तकनीक का उपयोग करें, जिससे न केवल उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होगा बल्कि उनकी आय में भी आशातीत वृद्धि सुनिश्चित हो सकेगी।
कार्यक्रम के दौरान 200 चयनित लाह कृषकों के बीच आवश्यक कृषि टूल-किट का वितरण किया गया। इन उपकरणों की उपलब्धता से किसानों को वैज्ञानिक पद्धति से लाह की खेती करने में सुगमता होगी। प्रशासन का यह उद्देश्य है कि किसान संसाधनों के अभाव में न रहें और तकनीक का पूर्ण लाभ उठाकर अपनी उत्पादकता बढ़ा सकें। टूल-किट वितरण को किसानों को सशक्त करने और उन्हें कृषि कार्यों के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित पदाधिकारियों द्वारा किसानों से विशेष अपील की गई कि वे सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी एवं अनुदान आधारित योजनाओं का लाभ उठाने हेतु आगे आएं। कृषकों को प्रोत्साहित किया गया कि वे स्वयं लाभान्वित होने के साथ-साथ अपने आसपास के अन्य किसानों को भी इन योजनाओं के प्रति जागरूक करें और उन्हें लाभ लेने हेतु प्रेरित करें। सामूहिक जागरूकता के माध्यम से ही कृषि क्षेत्र में व्यापक सुधार और ग्रामीण समृद्धि का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
इस अवसर पर मुख्य रूप से जिला सहकारिता पदाधिकारी, प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी तथा स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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