किसान अरूप कुमार महतो ने खेत में जलजमाव से निजात दिलाने की लगाई गुहार उपायुक्त से।

किसान अरूप कुमार महतो ने खेत में जलजमाव से निजात दिलाने की लगाई गुहार उपायुक्त से।
पीड़िता एक सप्ताह के भीतर समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे धरना-प्रदर्शन करेंगे।

चांडिल: सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल थाना क्षेत्र अंतर्गत लेंगडीह गांव के किसान अरूप कुमार महतो ने उपायुक्त से खेत में जलजमाव की समस्या से निजात दिलाने की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि एनएच-32 बाईपास सड़क निर्माण के बाद जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से उनकी कृषि भूमि में पिछले चार वर्षों से पानी जमा हो रहा है, जिससे खेती करना असंभव हो गया है।

मिली जानकारी के अनुसार, एनएच-32 बाईपास सड़क के किनारे स्थित किसान की 130 डिसमिल कृषि भूमि पिछले चार वर्षों से जलजमाव के कारण बर्बाद हो रही है। इस संबंध में किसान ने उपायुक्त से मुआवजा दिलाने अथवा जल निकासी के लिए पुलिया (कल्वर्ट) निर्माण कराने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे धरना-प्रदर्शन करेंगे।

लेंगडीह निवासी अरूप कुमार महतो का आरोप है कि रांची-टाटा-चांडिल-पुरुलिया एनएच-32 बाईपास सड़क को जमीन से लगभग 6 से 8 फीट ऊंचा बनाया गया है, लेकिन पानी की निकासी के लिए कहीं भी पुलिया या कल्वर्ट का निर्माण नहीं किया गया। इसके कारण मौजा लेंगडीह, खाता संख्या-24, प्लॉट संख्या-55 स्थित उनकी 130 डिसमिल कृषि भूमि में पूरे वर्ष पानी भरा रहता है।
किसान का कहना है कि जलजमाव के कारण वे न धान, न चना, न सरसों और न ही अन्य रबी फसलों की खेती कर पा रहे हैं। इस वर्ष उन्होंने 250 रुपये प्रति किलो की दर से 25 किलो हाइब्रिड धान का बीज खरीदा था, जो पानी में सड़कर पूरी तरह नष्ट हो गया। उनका दावा है कि पिछले चार वर्षों में उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।

अरूप कुमार महतो ने आरोप लगाया कि जब वे अपनी समस्या लेकर एनएचएआई (NHAI) के अधिकारियों के पास जाते हैं, तो उन्हें केस में फंसाने की धमकी दी जाती है। उन्होंने कहा, "डर के कारण हम खुलकर अपनी बात नहीं रख पाते। उपायुक्त महोदय से अनुरोध है कि हमारी जमीन से जल निकासी के लिए पुलिया बनवाई जाए तथा पिछले चार वर्षों में हुए नुकसान का उचित मुआवजा दिलाया जाए। यदि एक सप्ताह के भीतर न्याय नहीं मिला, तो हम चांडिल अंचल कार्यालय से उपायुक्त कार्यालय तक धरना-प्रदर्शन करेंगे।"
ग्रामीणों का कहना है कि 1960 के दशक में भी औद्योगिक विकास के नाम पर क्षेत्र की जमीन अधिग्रहित की गई थी, लेकिन आज तक यहां सड़क, नाला और सीवेज जैसी बुनियादी सुविधाओं का समुचित विकास नहीं हो सका। अब एनएच निर्माण के बाद जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने से खेती पूरी तरह चौपट हो गई है।

पीड़ित किसान ने जिला प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते जल निकासी की व्यवस्था नहीं की गई, तो क्षेत्र के कई अन्य किसानों की कृषि भूमि भी इसी तरह जलजमाव की समस्या से प्रभावित हो जाएगी। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है।

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