आदिम जन जाति परिवार आज भी कंद मुल को भुख मिटाने की जरिया बन गई है, इसका जिम्मेदार कौन?

चांडिल से चैनल के सहयोगी विजय गोप ने कहा कि आज भी हमारे देश में कंद मुल को भुख मिटाने का जरिया, बनाया।।इसका जीता जागता समस्या प्रस्तुत किया जा रहा है। 

आदिमजन जाति परिवार आज भी कंद मुल को भुख मिटाने की जरिया बन गई है, इसका जिम्मेदार कौन?

चांडिल,आदिम जनजाति की जीवन शैली बहुत ही मुश्किल भरी है। चांडिल के दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी की तराई में बसे इन परिवारों की जीविका जंगल से जुड़ी है। नीमडीह थाना क्षेत्र के लुपुंगडीह टोला आगोई डांगरा में रहने वाले पांच सवर परिवार के लोग शुद्ध पेयजल और पौष्टिक भोजन के लिए तरसते हैं। जंगल की झरने का पानी पीकर और कंदमूल खाकर जीवन यापन कर रहे हैं। बच्चों के कपड़े खरीदना भी मुश्किल है, नंगे बदन रहते हैं और जमीन पर सोते हैं। शिक्षा और परिधान की सुविधा नहीं है। जंगल से बांस लाकर झाड़ू बनाते हैं और जंगल की कंदमूल, फूल, फल बेचकर दो जून की रोटी जुटाते हैं। कभी-कभी भूखा पेट सोना पड़ता है। बुधनी सवर जैसी महिलाएं झाड़ू बेचकर परिवार का पेट पाल रही हैं। केंद्र सरकार की योजना इन परिवार को नहीं मिल रहा हे।ओर आदिम जनजाति समुदाय परिवार के लोग विलुप्त होते देखा जा रहा है।।दिन प्रतिदिन इन समुदाय के लोग विलुप्त की कगार पर है।राज्य सरकार की अनदेखी के कारण ये लोग अपने परिवार को किस प्रकार भरण पोषण कर रहे हैं क्ष


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