चनदरपुर गांव में विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया गया
चांडिल, सरायकेला खरसावां जिला विधिक सेवा प्राधिकार,सरायकेला खरसावां,के आदेश अनुसार चनदरपुर गांव में विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया गया विधिक सेवा प्राधिकार के PLVकार्तिक गोप ने लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने के लिए आवश्यक दिशा निर्देश दिए जो इस प्रकार है
'पहला सुख निरोगी काया'—यह कहावत सदियों से प्रचलित है और आज के दौर में इसकी प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है। पूरे विश्व में लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए प्रतिवर्ष 7 अप्रैल को 'विश्व स्वास्थ्य दिवस' मनाया जाता है। यह दिन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि मानवता को शारीरिक और मानसिक रूप से सशक्त बनाने का एक वैश्विक संकल्प है।
विश्व स्वास्थ्य दिवस का इतिहास विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की स्थापना से जुड़ा है। 7 अप्रैल 1948 को WHO की स्थापना हुई थी और इसी की याद में 1950 से प्रतिवर्ष इस दिवस को मनाने की शुरुआत हुई। हर साल WHO एक विशेष 'थीम' (विषय) निर्धारित करता है, जो उस समय की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौती पर आधारित होती है।
इस दिवस को मनाने के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
जागरूकता: लोगों को जानलेवा बीमारियों और उनसे बचाव के तरीकों के बारे में बताना।
समानता: यह सुनिश्चित करना कि स्वास्थ्य सुविधाएँ केवल अमीरों तक सीमित न रहें, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचें।
मानसिक स्वास्थ्य: शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक शांति और संतुलन पर जोर देना।
स्वच्छता: परिवेश को साफ रखकर बीमारियों को जड़ से मिटाना।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, बढ़ता प्रदूषण और मिलावटी खान-पान ने मनुष्य के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाला है। मधुमेह (Diabetes), हृदय रोग और तनाव जैसी समस्याएँ अब आम हो गई हैं। विश्व स्वास्थ्य दिवस हमें याद दिलाता है कि विज्ञान और तकनीक में प्रगति के बावजूद, 'निवारण उपचार से बेहतर है'
एक स्वस्थ जीवन जीने के लिए हमें कुछ बुनियादी आदतों को अपनाना चाहिए:
संतुलित आहार: ताजे फल, सब्जियाँ और पोषक तत्वों से भरपूर भोजन लें।
नियमित व्यायाम: योग, ध्यान या प्रतिदिन 30 मिनट की सैर शरीर को ऊर्जावान रखती है।
पर्याप्त नींद: शरीर की मरम्मत के लिए 7-8 घंटे की नींद अनिवार्य है।
नकारात्मकता से दूरी: नशीले पदार्थों का त्याग करें और सकारात्मक सोच रखे!
विश्व स्वास्थ्य दिवस हमें यह संदेश देता है कि स्वास्थ्य हमारा सबसे बड़ा धन है। यदि हम स्वयं स्वस्थ रहेंगे, तभी एक स्वस्थ समाज और समृद्ध राष्ट्र का निर्माण संभव है। आइए, इस दिन हम संकल्प लें कि हम अपने स्वास्थ्य की अनदेखी नहीं करेंगे और 'सर्वे सन्तु निरामयाः' (सभी रोगमुक्त रहें) के सपने को साकार करेंगे। उपस्थित ग्रामीण महिला।

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